MP में कर्ज से परेशान 3 किसानों ने किया सुसाइड

MP में कर्ज से परेशान 3 किसानों ने किया सुसाइड

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भोपाल. मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के बीच पिछले 24 घंटे में कर्ज से परेशान 3 किसानों ने खुदकुशी कर ली। इनमें से पहला मामला सीहोर जिले के जाजना गांव का है, दूसरा विदिशा जिले के जीरापुर गांव का और तीसरा मामला होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा का है। उधर, सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधवार को मंदसौर और पिपलिया मंडी जाएंगे।हाल में यहां किसान आंदोलन के दौरान हुई फायरिंग में 7 लोगों की मौत हो गई थी।

शिवराज सिंह चौहान बुधवार को मंदसौर जाएंगे। वे यहां किसानों के परिवारों से मिलेंगे।
– सीएम पिपलिया मंडी जाकर व्यापारियों से भी मिलेंगे। पिपलिया मंडी वही जगह है, जहां से किसान आंदोलन हिंसक हुआ था।
3 जगह 3 किसानों ने की खुदकुशी
पहला मामला
– सीहोर जिले के रेहटी के जाजना गांव में कर्ज से परेशान एक किसान ने खुदकुशी कर ली।
– बताया जा रहा है कि 55 साल के दुलीचंद पर बैंक का 4 लाख रुपए कर्ज था। इस बार अच्छी फसल हुई थी, लेकिन दाम अच्छे नहीं मिले, जिसकी वजह से उसने जहर खाकर जान दे दी।
– दुलीचंद के बेटे शेर सिंह ने बताया कि जब उनके पिता ने जहर खाया, तब घर पर कोई नहीं था। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
दूसरा मामला
– विदिशा से लगे शमशाबाद स्थित जीरापुर निवासी हरी सिंह जाटव (40) अपने शादीशुदा चार भाइयों और मां के साथ रहता था। कुछ दिन पहले उसके चाचा और ताऊ ने जमीन का सीमांकन (डिमार्केशन) कराया था।
– किसान के परिवार वालों का आरोप है कि सीमांकन के दौरान चाचा और ताऊ ने हरी सिंह की एक बीघा जमीन अपने हिस्से में मिला ली। हरि सिंह ने इसकी शिकायत पटवारी से की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
– बताया जा रहा है कि हरि सिंह पर बैंक का कुछ कर्ज भी था, जिसके लिए उसे बैंक वाले परेशान कर रहे थे। इस सब से वह तनाव में था और सोमवार को उसने जहर खा लिया। गंभीर हालत में उसे विदिशा के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। देर रात उसे भोपाल स्थित हमीदिया हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
तीसरा मामला
– होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा में कर्ज में दबे किसान माखनलाल दिगोदिया (68) ने मंगलवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
– माखनलाल रोजाना की तरह सुबह 4 बजे टहलने निकला था। काफी देर तक वो घर नहीं लौटा तो परिवार वाले उन्हें तलाशते हुए खेत पहुंचे। यहां माखनलाल की बॉडी पेड़ से लटकी हुई थी।
– गांव वालों के मुताबिक, माखनलाल कर्ज से परेशान था। उसकी 15 एकड़ में से ज्यादातर जमीन बिक चुकी थी और अब 2 से 3 एकड़ ही बची थी।
– मृतक के परिवार वाले सरकार से कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं।
क्या हैं किसानों की मांगें, क्यों अनशन पर बैठे थे शिवराज?
– महाराष्ट्र के बाद जून की शुरुआत में मध्य प्रदेश में भी किसानों ने आंदोलन शुरू किया था।
– मध्य प्रदेश के किसानों की मांग है कि उन्हें कर्ज माफी दी जाए, फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस मिले, जमीन के बदले मुआवजे पर कोर्ट जाने का हक मिले और दूध के रेट बढ़ाए जाएं।
– 3 जून को इंदौर में यह आंदोलन हिंसक हो गया था। बाद में मंदसौर, उज्जैन और शाजापुर जैसे राज्य के बाकी हिस्सों में फैल गया।
– मंदसौर में पुलिस की फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई। शांति की अपील करते हुए शिवराज ने अनशन भी किया।
कर्ज माफी पर क्या है सरकारों का रुख?
एमपी: राज्य के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि किसानों के लिए कर्ज माफी का सवाल नहीं उठता। वे इसके पक्ष में नहीं हैं।
महाराष्ट्र: आंदोलन कर रहे किसानों को बड़ी जीत तब मिली, जब महाराष्ट्र सरकार ने मापदंडों के आधार पर पूरी तरह कर्ज माफी का फैसला लिया। यहां कर्ज माफी के लिए पैनल बनेगा।
उत्तर प्रदेश:योगी आदित्यनाथ ने सीएम बनते ही फैसला किया था कि उत्तर प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ किया जाए। 2 करोड़ 15 लाख किसानों के एक लाख रुपए तक कर्ज माफ करने का फैसला लिया गया।
केंद्र: अरुण जेटली ने कहा है कि किसानों की कर्ज माफी पर केंद्र मदद नहीं करेगा। राज्यों को इसके लिए खुद पैसा जुटाना होगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
– सीएम चौहान ने किसानों पर केस खत्म करने, जमीन मामले में किसान विरोधी प्रावधानों को हटाने, फसल बीमा को ऑप्शनल बनाने, मंडी में किसानों को 50% कैश पेमेंट और 50% आरटीजीएस से देने का एलान किया था।
– यह भी कहा था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।
– सरकार ने यह भी एलान किया था कि एक आयोग बनेगा जो फसलों की लागत तय करेगा। उस पर किसानों को फायदा होने लायक कीमत मिले, यह सरकार सुनिश्चित कराएगी।

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