मध्यप्रदेश में इस समय बारिश का मौसम है, और खेतों से ताज़ा मूंग की फसल कटकर मंडियों और सरकारी खरीद केंद्रों तक पहुँच रही है। लेकिन नर्मदापुरम ज़िले के किसानों के लिए यह मौसम राहत नहीं, बल्कि संघर्ष और अपमान का प्रतीक बन गया है।
🚜 10 दिनों से लाइन में खड़े किसान
सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों को अपनी मूंग बेचने के लिए 10-10 दिन तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। बारिश में भीगते हुए, बिना किसी उचित व्यवस्था के, ये किसान अपने नंबर का इंतज़ार कर रहे हैं। कई किसानों की फसल बारिश में खराब हो रही है, लेकिन उन्हें कोई विकल्प नहीं मिल रहा।
💰 भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें
जहाँ एक ओर किसान ईमानदारी से अपनी अच्छी गुणवत्ता वाली मूंग लेकर केंद्र पर पहुँचते हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वेयर (गुणवत्ता जांच अधिकारी) भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जो किसान पैसे देते हैं, उनकी खराब गुणवत्ता वाली मूंग भी पास कर दी जाती है। लेकिन जो किसान रिश्वत नहीं देते, उनकी असल और अच्छी फसल को “खराब” बताकर रिजेक्ट कर दिया जाता है।
यह न केवल किसानों की मेहनत का अपमान है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विफलता का भी प्रमाण है।
🪧 छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन
नर्मदापुरम ज़िले में किसानों ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई। कई जगहों पर छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन हुए, किसान सड़क पर उतर आए और अपनी पीड़ा को सार्वजनिक किया। लेकिन दुर्भाग्यवश, अब तक न तो कोई सांसद (MP) और न ही कोई विधायक (MLA) किसानों से मिलने आया है। सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
🌱 किसानों की मांगें
- सर्वेयर की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए
- खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल किया जाए
- बारिश के मौसम में फसल की सुरक्षा के लिए तात्कालिक व्यवस्था हो
- भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- किसानों को सम्मानजनक मूल्य और व्यवहार मिले
📅 खरीद अवधि बढ़ाने की मांग
किसानों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि मूंग की सरकारी खरीद की अवधि को कम से कम एक महीने और बढ़ाया जाए। वर्तमान में बारिश के कारण फसल की कटाई और परिवहन में देरी हो रही है, जिससे कई किसान समय पर अपनी फसल केंद्र तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं।
- बारिश के मौसम में फसल की कटाई और ढुलाई में बाधा आती है
- लंबी कतारों और धीमी प्रक्रिया के कारण कई किसानों का नंबर समय पर नहीं आता
- एक अतिरिक्त महीने की खरीद अवधि से सभी किसानों को समान अवसर मिलेगा
- फसल की बर्बादी और आर्थिक नुकसान को रोका जा सकेगा
सरकार को चाहिए कि किसानों की इस व्यावहारिक मांग को गंभीरता से ले और खरीद अवधि को बढ़ाकर राहत प्रदान करे।
किसान देश की रीढ़ हैं, लेकिन जब वही रीढ़ टूटने लगे तो यह पूरे तंत्र की कमजोरी को दर्शाता है। नर्मदापुरम के किसानों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। यह समय है कि सरकार जागे, व्यवस्था सुधारे और किसानों को उनका हक दिलाए।


