मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी का महासंकट: भीषण गर्मी में 5 दिनों से कतार में किसान, ‘इ-उपार्जन’ पोर्टल ने बढ़ाई मुश्किलें

भोपाल/हरदा, 15 मई 2026: मध्य प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए इस साल का रबी मार्केटिंग सीजन किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं साबित हो रहा है। जहाँ एक ओर प्रदेश सरकार इसे ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में प्रचारित कर रही है, वहीं धरातल पर अन्नदाता अपनी उपज बेचने के लिए भीषण गर्मी, लू और प्रशासनिक कुप्रबंधन के बीच पिस रहा है।

पोर्टल की सुस्ती और स्लॉट बुकिंग का जंजाल

किसानों के लिए इस वक्त सबसे बड़ी सिरदर्द MP e-Uparjan पोर्टल की तकनीकी खामियां बन गई हैं। गेहूं बेचने के लिए अनिवार्य ‘स्लॉट बुकिंग’ की प्रक्रिया पोर्टल की सुस्ती और सर्वर डाउन होने के कारण ठप पड़ी है। विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री केवल हेलीकॉप्टर से हवाई निरीक्षण कर रहे हैं, जबकि जमीन पर किसान सर्वर फेल होने और स्लॉट बुकिंग बंद होने के कारण दर-दर भटक रहे हैं।

भीषण गर्मी में 4-5 दिनों का लंबा इंतज़ार

प्रदेश की विभिन्न सहकारी समितियों (Societies) और उपार्जन केंद्रों के बाहर गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच किसान 4 से 5 दिनों से अपनी बारी का इंतज़ार खुले आसमान के नीचे कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि नंबर आने में कई दिन लग रहे हैं और यदि स्लॉट की एक हफ्ते की तारीख निकल गई तो दोबारा बुकिंग करना नामुमकिन हो जाता है। इस इंतज़ार के कारण ट्रैक्टरों का किराया लागत से भी अधिक होता जा रहा है।

एमएसपी का सपना और व्यापारियों की लूट

सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 तय किया है, जिसमें ₹40 बोनस मिलाकर प्रभावी दर ₹2,625 प्रति क्विंटल होनी चाहिए। लेकिन सरकारी केंद्रों पर हो रही देरी और बारदाने (Gunny Bags) की कमी का हवाला देकर खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी रखी गई है। इस बेबसी का फायदा उठाते हुए निजी व्यापारी किसानों से मात्र ₹2,000 से ₹2,200 के भाव पर गेहूं खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल ₹400-₹600 का सीधा नुकसान हो रहा है।

कर्ज का बढ़ता जाल और ब्याज की मार

खरीदी में हो रही इस देरी ने मध्य प्रदेश के लगभग 6.2 लाख किसानों को कर्ज के जाल में धकेल दिया है। सहकारी बैंकों के कड़े नियमों के अनुसार, यदि किसान 28 मार्च तक अपना पुराना लोन नहीं चुकाते, तो 0% ब्याज की सुविधा समाप्त हो जाती है और ब्याज दर सीधे 12% तक पहुँच जाती है। फसल न बिक पाने के कारण किसान डिफॉल्टर घोषित हो रहे हैं, जिससे उन्हें अगली फसल की बुवाई के लिए निजी साहूकारों की शरण लेनी पड़ रही है।

हरदा: पहले ही दिन से अव्यवस्था का तांडव

हरदा जिले में स्थिति और भी तनावपूर्ण है, जहाँ सुल्तानपुर वेयरहाउस में खरीदी के पहले ही दिन प्रबंधन और सहकारी समितियों के बीच तुलाई की जगह को लेकर विवाद हो गया, जिससे खरीदी पूरी तरह ठप रही। इसके विरोध में किसानों ने ‘किसान जन क्रांति आंदोलन’ शुरू किया है और अब वे लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हैं।

निष्कर्ष

आज का किसान केवल प्रकृति की मार और अनमौसमी बारिश से ही नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता से भी लड़ रहा है। ‘डिजिटल इंडिया’ का नारा बुलंद करने वाली सरकार का ‘इ-उपार्जन’ पोर्टल किसानों के लिए सुविधा के बजाय बाधा बन गया है। यदि समय रहते केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं और पोर्टल में सुधार नहीं किया गया, तो अन्नदाता का यह पसीना आने वाले समय में बड़े जनाक्रोश में बदल सकता है।


संदर्भ (Sources):

  1. How MP’s ‘Farmer Welfare Year’ Became a Season of Ruin.
  2. Wheat Procurement at MSP now Farmers Require Slot Booking.
  3. Harda News: Wheat Procurement Hit By Chaos On Day One.
  4. LOP demands immediate procurement of wheat, says farmers waiting in queues.
  5. MP Wheat Procurement Crisis: Delays push 6.2 Lakh Farmers into Debt.
  6. Cooperative credit society loan and interest rate structure.
  7. Shortage of gunny bags causing procurement delays.
  8. Farmers forced to sell to traders below MSP in Madhya Pradesh.
  9. Transcript: Wheat procurement wait times and slot booking issues – Kisan India.
  10. Farmers protest in Harda over MSP and slot booking – Agniban.

Keywords: Wheat Procurement Issues MP, e-Uparjan portal server down, Farmer Debt Crisis Madhya Pradesh, MSP vs Market Price Wheat 2026, Harda Mandi Farmer Protest.

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