ज्वार की फसल में बोवाई के बाद प्रबंधन और देखभाल की संपूर्ण गाइड

ज्वार और बाजरा की फसल में बोवाई के बाद प्रबंधन और देखभाल की संपूर्ण गाइड

🌱 1. शुरुआती देखभाल, विरलीकरण एवं खरपतवार प्रबंधन

  • पौध संख्या व दूरी:
    • संकर व उन्नत किस्मों हेतु: 1,80,000 पौधे प्रति हेक्टेयर (कतार से कतार: 45 सेमी | पौधा से पौधा: 12 सेमी)।
    • द्विउद्देशीय किस्मों हेतु (Jawahar Jowar 1022, 1041, C.H.S. 18): 2,10,000 पौधे प्रति हेक्टेयर (45 सेमी × 10 सेमी)।
  • यांत्रिक खरपतवार नियंत्रण:
    • बोवाई के 15–20 दिन और 30–35 दिन बाद कतारों के बीच व्हील हो या डोरा चलाएं।
    • डोरा चलाते समय पौधों पर मिट्टी चढ़ाएं।
  • रासायनिक खरपतवार नियंत्रण:
    • सामान्य नियंत्रण: एट्राजीन (Atrazine) 0.5 से 1.0 कि.ग्रा./हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में मिलाकर अंकुरण से पूर्व छिड़कें।
    • अंगिया (Striga) खरपतवार: 2,4-डी सोडियम साल्ट (2 कि.ग्रा./हे.) का छिड़काव करें या उखाड़कर नष्ट करें।

🧪 2. पोषक तत्व एवं उर्वरक प्रबंधन

  • उर्वरक की कुल मात्रा: 80 कि.ग्रा. नत्रजन (N) : 40 कि.ग्रा. स्फुर (P) : 40 कि.ग्रा. पोटाश (K) प्रति हेक्टेयर।
  • जैविक खाद: बोवाई के समय 5 टन/हेक्टेयर गोबर या कम्पोस्ट खाद अवश्य डालें।
  • उर्वरक देने की सही विधि:
    • 📌 बोवाई के समय: स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा + नत्रजन की आधी मात्रा (40 कि.ग्रा.)।
    • 📌 टॉप-ड्रेसिंग (यूरिया): नत्रजन की शेष 40 कि.ग्रा. मात्रा फसल 30–35 दिन (घुटनों की ऊंचाई) की होने पर पौधों से 10–12 सेमी दूरी पर देकर मिट्टी में मिला दें।

💧 3. जल प्रबंधन एवं नमी संरक्षण

  • मेड़ एवं कुण्ड विधि (Ridge & Furrow): जल निकासी सुगम रहती है और मिट्टी में नमी संचित होती है।
  • मल्चिंग (Mulching): खेत में 6 टन/हेक्टेयर हरे खरपतवार बिछाने से नमी बनी रहती है।
  • सहनशीलता: फसल सूखा सहन करने में सक्षम है और कुछ समय के लिए जलभराव (Waterlogging) भी झेल सकती है।

🐛 4. कीट एवं बीमारी नियंत्रण (IPM दृष्टिकोण)

  • तना छेदक मक्खी (Shoot Fly):
    • लक्षण: इल्ली तने में प्रवेश कर बढ़ती कलिका खाती है, जिससे “नाड़ा” (Dead Heart) बनता है।
    • नियंत्रण: बोवाई के समय बीज के नीचे फोरेट 10% दानेदार (12-15 कि.ग्रा./हे.) डालें।
  • तना छेदक इल्ली (Stem Borer):
    • लक्षण: पत्तियों में छेद और तनों में सुरंग बनना।
    • नियंत्रण: 25–35 दिन की फसल पर कार्बोफ्यूरान 3% दानेदार (8-10 कि.ग्रा./हे.) पत्तियों के भोंगलों में डालें।
  • मीज मक्खी (Midge Fly):
    • लक्षण: मक्खी फूलों में अंडे देती है और इल्लियां दाने नहीं बनने देतीं।
    • नियंत्रण: 90% भुट्टे निकलने पर मेलाथियान 50 EC (1 लीटर/हे.) का 500-600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • दाने की फफूंद (Grain Mold):
    • लक्षण: दानों पर काली या गुलाबी फफूंद जम जाना।
    • नियंत्रण: डाईथेन एम-45 (0.3% घोल) का भुट्टों पर 3 बार छिड़काव करें (फूल आते समय, दूध बनते समय और पकते समय)।

🌾 5. कटाई एवं कटाई-उपरांत प्रबंधन

  • सही अवस्था: फसल की कटाई कार्यकीय परिपक्वता (Physiological Maturity) आने पर ही करें।
  • कडबी प्रबंधन: भुट्टों को अलग करके गहाई करें और पौधों को सुखाकर पशु आहार हेतु सुरक्षित रखें।
  • सुरक्षित भंडारण: दानों को अच्छी तरह सुखाकर जब उनमें नमी 10% से 12% रह जाए, तभी भंडारण करें।

 


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किसान भाइयों को धन्यवाद! अधिक जानकारी के लिए स्रोत देखें: किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मध्यप्रदेश

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