Not exploiting rivers – CM Shri Chauhan

The basis of mining policy should be environmental, development and human perspective
Launch of National Workshop by Chief Minister

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खनन नीति का आधार पर्यावरण संरक्षण, सतत् विकास और मानवीय दृष्टिकोण होना चाहिये। रेत से राजस्व अर्जित करना सरकार की मंशा कतई नहीं है। श्री चौहान ने आज एप्को सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि विकास के लिए रेत की सुलभ उपलब्धता हो। अवैध गतिविधियाँ बंद हों। नदियों का दोहन हो, शोषण नहीं। खनन दृष्टिकोण मानवीय हो। उन्होंने कहा कि इन्हीं उद्देश्यों पर आधारित खनन नीति निर्माण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है। श्री चौहान ने सरकार द्वारा खनन नीति निर्माण के विभिन्न स्वरूपों का चरणबद्ध उल्लेख किया और कार्यशाला में विचारणीय मुद्दों को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि प्रदेश की खनन नीति का स्वरूप कार्यशाला के मंथन से निकला अमृत निर्धारित करेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि प्रकृति पर केवल मानवमात्र का अधिकार नहीं है। जीव-जंतुओं, चल-अचल सभी तत्वों का समान अधिकार है। अत: प्रकृति के साथ संतुलित व्यवहार जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर होने वाले आत्मघाती प्रभावों के संकेत पृथ्वी के तापमान में वृद्धि, अवर्षा, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आने लगे हैं। अनेक जीव-जंतु धरती से विलुप्त होने लगे हैं। महाशीर मछली सहित अनेक जीव-जंतु विलुप्ती के कगार पर है, उनके संरक्षण के प्रयास हो रहे हैं। संसार में सर्वत्र चिंता हो रही है। प्रदेश के नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण के लिये नर्मदा सेवा यात्रा के संकल्प और 12 घंटों में 7 करोड़ 13 लाख पौधे रोपकर इस दिशा में अपना फर्ज निभाया है। श्री चौहान ने कहा कि यह जरूरी हो गया है कि हम भावी पीढ़ी के लिए स्वस्थ वातावरण छोड़ें जिसमें सभी के लिये जीवन के समान अवसर हों।

Shri Chauhan said that we should take as much as nature can be compensated. Take as much sand from the river which he can fill himself. Balance in environment and development is the basis of our policy. One sided attempts are not appropriate. Sand excavations from the river come to the river if it is completely closed. The fertile land of the edge begins to turn into sand. Similarly, the spontaneous availability of sand for development makes a crisis for the survival of the river by increasing the indiscriminate divider competition. The Chief Minister said that it is imperative that the policy becomes balanced and behavioral. The competition of economic benefit is not generated from the mining policy. Home

Chief Minister acknowledged the experts of the workshop that contemplate the overall and human perspective on mining policy. There is a scientific process of mining, which will preserve the ecology as well as to create employment opportunities. He expressed hope that the workshop will be cooperative in the mining policy construction of the state as well as in the mining policy construction of the country.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायाधिपति श्री दिलीप सिंह ने कहा कि कार्यशाला का आयोजन अत्यंत सराहनीय पहल है। गहन चिंतन से खनिकर्म से संबंधित विभिन्न पहलुओं में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। कार्यशाला के निष्कर्ष सस्टेनबल पॉलिसी निर्माण में सहयोगी होंगे। उन्होंने प्रतिभागियों का आव्हान किया कि वे विषय विशेषज्ञ हैं। जमीनी हकीकतों से सीधे जुड़े हैं। उनके विचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सब खुलकर विचार, सुझाव और शंकायें प्रस्तुत करें ताकि नदी प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था हो। पर्यावरण, राजस्व और उपभोक्ता हितों का प्रभावी संरक्षण हो। उन्होंने कहा कि विकास के लिए खनिकर्म जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी भावी पीढ़ी के लिये स्वस्थ पर्यावरण छोड़ना है। पर्यावरण और विकास में संतुलन होना चाहिए। विकास के लिए रेत के विकल्पों को भी तलाशा जाये। अवैध उत्खनन को प्रतिबंधित करने के लिए सम्बद्ध विभागों का तंत्र सुदृढ़ हो। मानीटरिंग प्रक्रिया मजबूत हो। खनन वैज्ञानिक तरीके से हो। खनन की अनुमति खनिज की उपलब्धता के आधार पर मिले। पर्यावरण अनुमतियाँ मौका मुआयना के बाद ही प्रदान करने आदि की व्यवस्थायें होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि खनन कैसे हो, कहाँ हो, कितना हो, इसके स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए।

Shri Rajendra Shukla, Minister of Mineral Resources, said that the workshop has been organized to formulate the pathological principles of creating a flower-proof of the state’s mining policy. Effort that minerals are available for development tasks. The opposite effect of mining does not lie on the health of the river. There is no risk for the life of the organism. He said the availability of sand in the state is 7 crore cubometers. Requirement 3 crore cubic meters are collected. The endeavour is to become a policy that suits sand harvesting. The more sand flows, the more excavations from the river. Illegal excavations are completely restricted. Sand marketing system is the common consumer

खनिज निगम अध्यक्ष श्री शिव चौबे ने कार्यशाला में आभार प्रदर्शन किया। संचालन श्री सुधीर कोचर ने किया। प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत रूद्राक्ष का पौधा और श्री अमृतलाल वेगड़ की पुस्तकों, सौंदर्य की नदी नर्मदा एवं अमृतस्थ नर्मदा भेंट कर किया गया। उद्घाटन सत्र में राज्य की खनन नीति पर तेलगांना संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म श्री सुशील कुमार ने और छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म श्री डी.महेशबाबू ने पावर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन दिया। बताया गया कि कार्यशाला के दौरान समानांतर रूप से तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया है। जिसमें विषयवार विशेषज्ञ चिंतन कर विचार प्रस्तुत करेंगे। चौथा समापन का निष्कर्ष सत्र होगा। कार्यशाला की अनुशंसाएं प्रस्तुत की जायेंगी। कार्यशाला का विषय नदियों की पारिस्थितिकी के अनुकूलन, रेत हार्वेस्टिंग एवं विपणन नीति निर्धारण था। आयोजन भौमिकी एवं खनिकर्म संचालनालय म.प्र. और राज्य खनिज निगम लिमिटेड के तत्वावधान में किया गया था।

Shri B.P. Singh, Chief Secretary in the workshop, Vice President Mineral Corporation Shri Giriraj Kishore, the eminent expert, thinker and researcher of various organizations and subjects related to the country’s miner.

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