MP to 5th time Agricultural Deeds Award, PM Modi Bole, Two Timers of New India, Farmers and Scientists

Wheat production in MPR has increased by 7.64 percent in the year 2015-16 against 2014-15.

Krishi karman award madhya pradesh
PM Narendra Modi handed over the Trophy to CM Shivraj Singh Chauhan and Minister of Agriculture Gaurishankar Bissen.

मध्यप्रदेश लगातार पांचवीं बार कृषि कर्मण अवार्ड लेने वाला पहला राज्य बन गया है। प्रदेश को यह अवार्ड वर्ष 2015-16 में गेहूं के उत्पादन की श्रेणी में दिया गया। शनिवार को दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को ट्रॉफी सौंपी। इस अवार्ड के साथ ही मप्र ने पंजाब-हरियाणा को गेहूं उत्पादन में पीछे छोड़ दिया है। अवार्ड के रूप में प्रदेश को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र और 2 करोड़ रु. नगद पुरस्कार दिया गया। पीएम बोले, न्यू इंडिया के दो पहरियों से मिलने का मौका मिला – प्रधानमंत्री पीएम ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि न्यू इंडिया को बनाने में बहुत बड़ी भूमिका कृषि मेले की है। इस मेले के माध्यम से न्यू इंडिया के दो पहरियाें से बात करने का मौका मिला है। न्यू इंडिया का प्रथम पहरी हमारा अन्नदाता है, जो अपनी मेहनत से हमें भोजन उपलब्ध करवाता है। वहीं दूसरे प्रहरी हमारे वैज्ञानिक हैं, जो नई तकनीकी से किसान का जीवन आसान करने में लगे हुए हैं। आज हमारे किसान तकनीकी माध्यम से हमसे सीधे जुड़े हुए हैं। – यहां आने से पहले मैंने यहां लगे विशाल मेले को देखा, वहां किसानों से वैज्ञानिकों से मिला, बात की और नई तकनीकी को देखा। यहां कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित करने का मौका मिला है। यह पुरुस्कार अापकी मेहतन का नतीजा है। अाप का काम अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा है। मेघायल को एक अलग पुरस्कार दिया गया है। क्षेत्रफल में छोटा होने के बाद भी मेघायल ने पैदावार में 5 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहां के किसान बधाई के पात्र हैं। सरकार किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए प्रयासरत है। हरियाणा-पंजाब को पीछे छोड़ा – मप्र ने पारंपरिक रूप से सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले हरियाणा और पंजाब को भी पीछे छोड़ दिया है। सीएम ने इस उपलब्धि के लिए सभी को बधाई देते हुए किसानों के लिए और अधिक काम करने की बात कही है। 2015-16 में 7.64 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी – बता दें कि, कृषि अवार्ड मिलने की स्पष्ट वजह यह थी कि गेहूं उत्पादन में वर्ष 2014-15 के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 7.64 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। – वर्ष 2014-15 में 171.03 लाख टन गेहूं उत्पादन हुआ था, जो 2015-16 में बढ़कर 184.10 लाख टन हो गया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि किसानों की लगन और कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और कृषि विभाग के मैदानी अमले के सहयोग से यह उपलब्धि हासिल हुई है। प्रति हैक्टेयर उत्पादन बढ़ा – प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता बढ़कर 3115 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर हो गई है। पिछले साल यह 2850 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। – इनमें सिंचाई, विद्युत, तकनीकी परामर्श, ब्याज रहित ऋण, मंडी प्रांगण में उपार्जन की ई-सुविधा मुख्य रूप से परिवर्तनकारी साबित हुई है। – कृषि कर्मण अवार्ड के साथ-साथ प्रदेश के कृषक समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रदेश के 2 सर्वश्रेष्ठ गेहूं उत्पादक कृषकों, एक पुरुष कृषक तथा एक महिला कृषक को भी पुरस्कार के रूप में सम्मान स्वरूप दो-दो लाख रुपए की नगद राशि का पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र मिला। – इससे पहले वर्ष 2013-14 में भी मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में मिला था, जबकि वर्ष 2011-12, वर्ष 2012-13 एवं वर्ष 2014-15 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में यह अवार्ड मिल चुका है। इन्हें भी मिला पुरस्कार – मप्र के अलावा तलहन के लिए पश्चिम बंगाल को अवार्ड दिया गया, जबकि तिलहन के लिए असम को पुरस्कृत किया गया। मेघायल को उच्चतम उत्पादन के लिए प्रोत्साहन राशि दी गई। – पंडित दीनदयाल कृषि विज्ञान प्रोत्साहन राशि का राष्ट्रीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ के कांकेर कृषि विज्ञान केंद्र को दिया गया। क्षेत्रिय पुरुस्कार हिमाचल के मंडी औरर कृषि विज्ञान केंद्र कुरूक्षेत्र हरियाणा को दिया गया। जोनवार इन्हें मिला पुरस्कार – लखनऊ और कोसांबी कृषि विज्ञान केंद्र, औरंगाबाद, बिहार, सोनितपुर असम, मेघालय, तापी, गुजरात, दतिया मप्र, वेस्ट गोदावरी आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और केरला शामिल हैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment is processed.

EnglishenEnglishEnglish