सिंचाई सुविधा

किसानों को मिले पर्याप्त सिंचाई सुविधा

दण्डित होंगे दोषी अधिकारी – जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र

जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के निर्देश पर आगामी 20 जनवरी से ग्वालियर जिले के डबरा और भितरवार क्षेत्र के किसानों के हित में हरसी नहर से पानी छोड़ा जाएगा। मंत्री डॉ. मिश्र ने आज इस संबंध में क्षेत्र की सिंचाई सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। क्षेत्र के किसानों के सुझाव पर जल संसाधन मंत्री द्वारा आपात बैठक बुलाकर इस संबंध में सख्त निर्देश दिए है। मंत्री डॉ. मिश्र कहा कि किसान हितेषी सरकार ने निरंतर सिंचाई सुविधाएं बढ़ाकर किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है। अच्छी सिंचाई सुविधाओं के कारण ही प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ा है और प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र में पुरस्कृत हो रहा है।

टेल एण्ड तक पहुंचे पानी

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय दर्शन का आधार बनाकर कार्य कर रही है। सबसे निर्धन और सबसे जरूरत मंद तक योजनाएं पहुंचे, यही सरकार का प्रमुख लक्ष्य और प्राथमिकता है। यदि नहरों के आखिरी छोर तक पानी ले जाकर किसानों के खेतों तक पहुंचे, तभी योजनाएं अपनी सार्थकता सिद्ध करेंगी।

दण्डित होंगे दोषी अधिकारी

जल संसाधन मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाया जाए। सोमवार 15 जनवरी से मडीखेड़ा से हरसी में और फिर 20 जनवरी से नहरों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। इस कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारी दण्डित किए जाएंगे।

महिला स्व-सहायता समूह

महिला स्व-सहायता समूहों की मदद के लिये हर जिले में होगा एक नोडल अधिकारी

महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी
महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेंगी नई जिम्मेदारियां
“दिल से” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों से चर्चा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियां आँदोलन का रूप ले रही हैं। महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत बनाने और आर्थिक गतिविधियां चलाने में उनकी मदद और तकनीकी परामर्श के लिये हर जिले में एक नोडल अधिकारी होगा। ये नोडल अधिकारी संबंधित विभागों, जिला प्रशासन, बैंकों और संबंधित संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर स्व-सहायता समूहों को आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

मुख्यमंत्री आज यहां आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रसारित दिल से कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य बहनों को संबोधित कर रहेथे। उन्होने स्व-सहायता समूहों के गठन, प्रबंधन, उत्पादों, मार्केटिंग, संगठनात्मक शक्ति, नई जिम्मेदारियां पूरी करने और महिला सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से बातचीत की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मासूम बेटियों के साथ दुराचार करने वाले हैवानों को फांसी देने का कानून बनाकर राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिये भेजा गया है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिये किये गये कई अनूठे प्रयासों और उपायों की भी विस्तार से चर्चा की।

श्री चौहान ने कार्यक्रम में मकर संक्रांति की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि सहभागिता, बंधुत्व तथा परस्पर सहयोग की भावना को बढ़ाकर जन-जीवन में आनंद का संचार करने के लिये ग्रामीण और शहरी, सभी क्षेत्रों में 14 से 21 जनवरी तक आनंद उत्सव मनाया जा रहा है।

स्व-सहायता समूहों को मिलेंगी नई जिम्मेदारियां

श्री चौहान ने कहा कि सरकार महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को कई सहूलियतें दे रही है। स्व-सहायता समूहों की प्रशिक्षण नीति की समीक्षा कर नई नीति बनाई जायेगी। यदि स्व-सहायता समूह  अच्छी गुणवत्ता का कोई उत्पाद बनाते हैं, तो उनके उत्पादों की खरीदी पर भी विचार किया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूह के फेडरेशन को टेक होम राशन निर्माण की जिम्मेदारी दी जा रही है। उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे वैज्ञानिक रूप से पोषण आहार तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों के फेडरेशन को मिलने वाले पांच करोड़ रुपये तक के लोन की बैंक गारंटी सरकार देगी। राज्य आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित और अन्य स्व-सहायता समूह द्वारा लिये गये ऋण पर देय ब्याज का तीन प्रतिशत ब्याज सरकार चुकायेगी। उन्हें स्टाम्प शुल्क नहीं लगेगा।

श्री चौहान ने कहा कि कई महिला स्व-सहायता समूह विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन एवं आंगनवाड़ी में गर्म पोषण आहार उपलब्ध करवा रहे हैं। ये समूह लगभग 1500 करोड़ रूपये का कार्य कर रहे हैं। इन समूहों से जुड़ी बहनों को अब स्कूली बच्चों के यूनिफार्म बनाने की जिम्मेदारी भी दी जा रही है। ये प्रति वर्ष 70 लाख बच्चों की यूनिफॉर्म तैयार करेंगी। इससे वह 280 करोड़ रूपये का सालाना कारोबार करेंगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में बिजली मीटर रीडिंग एवं बिल वितरण कार्य में भी महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़ा जा रहा है। उन्हें बिजली मीटर रीडिंग, बिल वितरण और राजस्व वसूली की जिम्मेदारी मिलेगी। यह व्यवस्था प्रयोग के तौर पर पहले रायसेन, विदिशा एवं राजगढ़ जिले के 10-10 गांव में शुरू होगी।

श्री चौहान ने कहा कि स्वच्छता अभियान को कामयाब बनाने में स्व-सहायता समूहों की मदद ली जायेगी। इन बहनों को वाहन एवं सफाई में काम आने वाले उपकरणों के लिये वित्तीय सहायता दी जायेगी। वे सफाई दूत बनेंगी और उनके समूहों की आमदनी भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्व-सहायता समूह की 7300 महिलाएं मनरेगा के अंतर्गत कार्यों का सोशल आडिट कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक समय की नारी अबला नहीं बल्कि सबला है और बेटियां अब बोझ नहीं वरदान  हैं। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज, प्रदेश और देश की उन्नति के लिये महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण जरूरी है। इसके लिये महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को मजबूत किया जायेगा। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने का मजबूत इरादा रखने वाली बहनें जब एकजुट होकर कोई काम करती हैं, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है। एक जैसी सोच रखने वाली बहनों का समूह ही स्व-सहायता समूह का रुप ले लेता है। उन्होंने कहा कि जब दृढ़ संकल्प, कौशल, लगन और  आत्मविश्वास  एक साथ मिल जायें तो इतनी ऊर्जा उत्पन्न होती है कि कोई भी काम असंभव नहीं रहता। जब एक जैसी सोच वाले लोग मिलकर काम करें तो प्रगति के नये रास्ते खुलने लगते हैं। बहनों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, तो वे समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।

ढ़ाई सौ करोड़ की बचत

मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब दो लाख से ज्यादा महिलाओं के स्व-सहायता समूहों की बचत  ढ़ाई सौ करोड़ रुपए हो गई है। विपत्ति में इससे मदद मिलती है। उन्होने बताया कि 1 लाख 43 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों की सदस्य बहनों की सालाना आमदनी 1 लाख रुपये से भी ज्यादा हो रही है। वे अपने परिवारों में खुशहाली लाई हैं।

मुख्यमंत्री करेंगे समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महिलाओं के स्वसहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग करेंगे। कई स्व-सहायता समूह के उत्पाद ब्रांडेड कंपनियों के उत्पादों से बेहतर हैं। जड़ी-बूटी युक्त साबुन, कुटकी चावल, अगरबत्ती, रोस्टेट अलसी, गुड़ और फल्ली दाने की चिक्की, फूल मालाएं, हल्दी पाउडर जैसे उत्पादों की चर्चा बाजार में हो रही है। उन्होने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह साबुन-निर्माण, गुड़, मूंगफली चिक्की निर्माण, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, हथकरघा, परिधान-निर्माण, सेनेटरी नेपकिन निर्माण, मुर्गीपालन एवं विभिन्न कृषि आधारित आदि कार्य कर रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इनके द्वारा वर्मीपीट और नॉडेप भी बनाये गये हैं।

डिण्डौरी जिले में महिलाएं कोदो-कुटकी का उत्पादन एवं प्रसंस्करण कर रही हैं। एक परियोजना में आंगनवाड़ियों में कोदो-कुटकी की चिक्की भी प्रदाय कर रही हैं। महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने 10 मुर्गी उत्पादक कम्पनियां बनाई हैं जिनमें पांच हजार से ज्यादा महिलाएं मुर्गी पालन एवं मुर्गियों का व्यापार कर रही हैं। वर्ष 2016-17 में इन महिलाओं ने लगभग 175 करोड़ रुपये का व्यापार किया है।

आर्थिक गतिविधियों के अलावा महिलाओं के स्व-सहायता समूह सामाजिक जन-जागरण के कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसमें नशा-मुक्ति, बाल विवाह रोकने, बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ अभियान जैसे सामाजिक कार्य शामिल हैं।

सफल स्व-सहायता समूहों की सराहना

मुख्यमंत्री ने कई सफल स्व-सहायता समूहों का उल्लेख करते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने बड़वानी जिले के भिलखेड़ा गांव के गणेश स्व-सहायता समूह, सागर जिले के देवरी विकासखंड के सिमरिया के सपना स्व-सहायता समूह, शहडोल जिले के सुहागपुर विकासखंड के कल्याणपुर के लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, श्योपुर जिले के रतोदन गांव के महादेव स्व-सहायता समूह की चर्चा की और इनसे जुड़ी महिला सदस्यों की आर्थिक प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बैतूल जिले के 70 गांवों की 931 आदिवासी महिलाओं की सतपुड़ा वूमन सिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की चर्चा करते हुए बताया कि कैसे इन महिलाओं ने रेशम उत्पादन से अपनी जिन्दगी बदली।

महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

महिला सुरक्षा के प्रति सरकार का संकल्प दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फांसी होगी।  इसके लिये कानून बनाकर राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिये भेजा गया है। उन्होने महिला सुरक्षा के लिये किये गये प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि 82 हजार से अधिक शौर्या दल कार्य कर रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्य स्तरीय महिला हेल्प लाईन 1090 शुरू की गई है, जिसमें महिलाएं निडर होकर अपनी शिकायतें दर्ज करा रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिये जिला मुख्यालयों में निर्भया पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है।

बिना सीसीटीवी वाली बसों को परमिट नहीं

श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में मैत्री पुलिस पेट्रोलिंग शुरू की गई है। इसमें पेट्रोलिंग वाहन विद्यालयों, महाविद्यालयों, उद्यानों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों की निगरानी करते हैं। महिला थाने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सतना, सागर, जबलपुर, रीवा, रतलाम और कटनी में स्थापित किये गये हैं। इनमें पीड़ितों की त्वरित सुनवाई होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल एवं सिटी बसों में बहनों और बेटियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने और अपराधियों पर सख्त कार्यवाही करने के लिए इन बसों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। जो बस मालिक कैमरे लगायेंगे,  उन्हें ही बस का परमिट दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके अलावा सभी जिलों में फास्टट्रेक कोर्ट गठित किये गये हैं। उन्होने बेटियों और महिलाओं से आग्रह किया किया सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति यदि अभद्र व्यवहार करता है तो आप निडर होकर पूरे साहस के साथ इसकी शिकायत करें। पुलिस की वेबसाइट एवं एप्प एम.पी.ई.कॉप पर एस.ओ.एस. सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा का उपयोग कर डायल 100 पर एवं अपने नजदीकियों को तत्काल जानकारी भेजी जा सकती है। श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं की शिकायतों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिये 141 महिला डेस्क स्वीकृत की गई हैं।

महिलाओं की सुरक्षा सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और पूरी संवेदनशीलता के साथ सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, लेकिन समाज का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गो का आव्हान किया कि वे सरकार के प्रयासों में पूरा सहयोग करें। बच्चों को महिलाओं और बेटियों का सम्मान करने का संस्कार दें। उन्होंने कहा कि इस विषय पर स्कूली पाठ्यक्रमों में इस संबंध में पाठ शामिल किये जायेंगे और नये सिरे से ‘बेटी बचाओ अभियान’ प्रारंभ किया जायेगा। उन्होंने भिण्ड जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार के सघन अभियान के फलस्वरूप अब भिण्ड में लिंगानुपात सुधर रहा है।

श्री चौहान ने स्वामी विवेकानंद जयंती- युवा दिवस की चर्चा करते हुए कहा कि स्वामी जी के विचारों में लोगों को ऊर्जावान बनाने की अदभुत शक्ति है। श्री चौहान ने प्रदेश में 19 दिसम्बर से शुरू हुई ‘एकात्म यात्रा’ की चर्चा करते हुए कहा कि यह यात्रा चार अलग-अलग मार्गों से प्रारम्भ की गई है। केरल में शंकराचार्य जी की जन्मस्थली से ‘शंकराचार्य संदेश वाहिनी’ भी रवाना की गई है। सभी यात्रायें 21 जनवरी को ओंकारेश्वर पहुँचेंगी। इन यात्राओं के माध्यम से अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रति लोगों को जागरूक करना है। समाज के सहयोग से ओंकारेश्वर में 108 फीट ऊँची आदि शंकराचार्य जी की अष्टधातु की विशाल प्रतिमा स्थापित की जायेगी।

श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश के रहने वाले विदेशों में बसे भारतीयों का इंदौर में फ्रेण्ड्स ऑफ एम.पी. सम्मेलन – 3 और 4 जनवरी कोआयोजित किया गया । इसमें 20 से अधिक देशों के मित्र शामिल हुये। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के विकास में सहयोग से जुडे विषयों पर चर्चा हुई।

अपने शहरों को स्वच्छ बनायें

श्री चौहान ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने शहरों को साफ रखने में स्व प्रेरणा से योगदान दें। स्वच्छ सर्वेक्षण – 2018  में उत्साहपूर्वकभागीदारी करें। पिछले सर्वेक्षण में भारत के सौ में से 22 शहर मध्यप्रदेश के चुने गये थे। इस सर्वेक्षण में भी अपने शहरों की साफ-सफाई में योगदान दें। श्री चौहान ने कहा कि अगली 24 जनवरी को नर्मदा जयंती आ रही है। उन्होंने नर्मदा मैया को साफ सुथरा रखने का संकल्प दोहराने का आव्हान किया। भावांतर भुगतान योजना की चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि इसे  सफलता मिली है। किसानों के लिये यह हितकारी साबित हुई है। अभी तक 6 लाख 35 हजार किसानों को 834 करोड़ रुपए का भुगतान किया हो चुका है। बाकी राज्य भी इसे अपने यहां लागू करने के लिये इसका अध्ययन कर रहे हैं।

 

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मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना

27,116 विद्यार्थियों की 53,16,09318 रुपये की फीस का हुआ भुगतान

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना में 12 जनवरी तक 27 हजार 116 विद्यार्थियों की 53 करोड़ 16 लाख 9 हजार 318 रुपये की फीस का भुगतान किया जा चुका है। योजना में कुल 28 हजार 88 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27 हजार 197 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं।

स्वीकृत आवेदनों में से आईआईएम के दो, तकनीकी शिक्षा के 187, मध्यप्रदेश स्थित आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, एनआईएफटी, एसपीए के 32 और मध्यप्रदेश के बाहर की इन संस्थाओं के 171, क्लेट के 24, जेईई रैंक (प्रदेश के बाहर के प्रायवेट कॉलेज) के 23, मेडिकल के 618, उच्च शिक्षा के 25,873 और अन्य विषयों के 267 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं।

योजना में खरगौन के श्री पवन मण्डलोई का नीट के माध्यम से अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस इंदौर, भोपाल की कु. शुभांगी बागरे का स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड ऑर्किटेक्चर भोपाल, इंदौर की कु. अनुज्ञा मुकाती का क्लेट के माध्यम से एनएलआईयू भोपाल, सिवनी के श्रेयांश ठाकुर का आईआईटी इंदौर में एडमिशन हुआ है। इनके साथ ही अन्य सभी चयनित विद्यार्थियों की फीस मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से दी गई है।

भावांतर योजना

नवम्बर में फसल बेचने वाले 5.12 लाख किसानों को मिलेगी 704 करोड़ भावांतर राशि

भावांतर योजना से मंडियों की आवक में अप्रत्याशित वृद्धि

भावांतर भुगतान योजना में पंजीबद्ध 5 लाख 12 हजार किसानों ने एक से 30 नवम्बर 2017 के बीच अधिकृत कृषि उपज मण्डियों में अपनी फसल समर्थन मूल्य पर व्यापारियों को बेची। राज्य सरकार द्वारा इन किसानों को कुल 703 करोड़ 96 लाख रुपये भावांतर राशि इसी माह बैंक खातों में दी जाएगी। इसके पूर्व योजनान्तर्गत 16 से 31 अक्टूबर 2017 तक 1.28 लाख पंजीकृत किसानों ने अधिकृत मंडियों में अपनी फसल बेची थी। इन्हें राज्य सरकार ने 136 करोड़ 75 लाख रुपये भावांतर राशि का भुगतान कर दिया है। इसी योजना में मक्का की विक्रय अवधि को राज्य सरकार ने 31 जनवरी 2018 तक बढ़ा दिया है।

प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना में 21 लाख 88 हजार 764 किसानों ने पंजीयन कराया है। योजना में 41 लाख 43 हजार 389 हेक्टयर रकबा कवर किया गया है। किसानों को भावांतर राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सिस्टम से सीधे बैंक खाते में किया जा रहा है। इसकी सूचना किसानों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से भी दी जा रही है। किसानों को भावांतर राशि के साथ गोदाम भंडारण अनुदान राशि भी दी जा रही है। दोनों लाभ एक साथ दिए जा रहे है। गोदाम भंडारण अनुदान को 7 रुपये प्रति क्विंटल प्रतिमाह से बढ़ाकर 9 रुपये 90 पैसे प्रति क्विंटल प्रतिमाह कर दिया गया है।

भावांतर भुगतान योजना ने किसानों को उपज के भाव के उतार-चढ़ाव से वास्तव में मुक्ति दिलवाई है। वर्ष 2016 और 2017 के अक्टूबर तथा नवम्बर माह के दौरान मंडियों में अब तक के आकड़े यही दर्शाते हैं।

अक्टूबर 2017 में अक्टूबर 2016 की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक 31 लाख 65 हजार टन आवक मंडियों में दर्ज हुई है। इससे मंडियों की आय में भी इजाफा हुआ है। यह भावांतर भुगतान योजना का ही परिणाम है।

अक्टूबर 2017 में 91 करोड़ 12 लाख रूपये मंडियों की आय रही जो अक्टूबर 2016 की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह नवम्बर 2017 में 122 करोड 16 लाख रुपये मंडियों की आय रही जो नवम्बर 2016 की आय की तुलना में 66 प्रतिशत अधिक है।

प्रदेश में 51 उप मंडी प्रांगणों को क्रियाशील कर इसमें भी योजना लागू की गई है। इसके साथ ही 20 हॉट-बाजारों को भी योजना के क्रियान्वयन के लिए क्रियाशील किया गया है

 

भावांतर योजना

डिफाल्टर किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर मूलधन जमा कराने का मौका दिया जाएगा

भावांतर योजना में किसानों को 400 करोड़ की भावांतर राशि का भुगतान 
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मण्डीदीप में 820 करोड़ के कार्यो का किया लोकार्पण-भूमि-पूजन 
पूर्व मुख्यमंत्री श्री पटवा की पुण्य-तिथि पर 33 हजार जरूरतमंदों को हित-लाभ वितरित

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री सुंदरलाल पटवा की प्रथम पुण्य-तिथि के अवसर पर आज मण्डीदीप में अंत्योदय-सह-स्व-रोजगार मेले में 820 करोड़ की लागत के निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। श्री चौहान ने मेले में सरकार की हितग्राहीमूलक योजनाओं से भी 33 हजार हितग्राहियों को लाभान्वित किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि श्री सुंदरलाल पटवा के दिखाए मार्ग पर चल कर राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिये संकल्पित प्रयास कर रही है। प्रदेश को देश में प्रथम पंक्ति का राज्य बनाने के लिये विकास एवं कल्याण की योजनाएँ चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिये भावांतर योजना बनाई गई है। इस योजना में चार हजार किसानों को अभी तक 400 करोड़ की भावांतर राशि का भुगतान किया गया है।

किसानों के लिये नयी समाधान योजना

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसानों के लिए नई समाधान योजना बनाई जा रही है। इसमें डिफाल्टर किसानों को मूलधन की किश्त बनाकर शून्य प्रतिशत ब्याज पर जमा करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गरीबों को आवासीय पट्टे देकर उन्हें अपने घर का मालिक बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। श्री चौहान ने बताया कि भोजपुर क्षेत्र के शहरी गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में 5 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

मंडीदीप में पोलीटेक्निक और बाड़ी सुल्तानपुर में कॉलेज खुलेंगे

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पंचायतों में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत निर्मित करने के उद्देश्य से उन्हें रेत खदानों की नीलामी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। श्री चौहान ने बताया कि गरीबों के घर में रोशनी के लिए 200 रूपए एवरेज पर बिना मीटर के विद्युत प्रदाय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा दिलाने के लिये विधानसभा में विधेयक पास किया गया है। श्री चौहान ने मंडीदीप में पॉलीटेक्निक कॉलेज और बाड़ी तथा सुल्तानपुर में कॉलेज खोलने की घोषणा की।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर, पूर्व केबिनेट मंत्री श्री विक्रम वर्मा, पूर्व मंत्री श्री कैलाश चावला, पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद श्री प्रभात झा, वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार, खनिज, वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी, छत्तीसगढ़ के कृषि तथा जल-संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ के मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डे, उदयपुरा विधायक श्री रामकिशन चौहान, विधायक श्री कैलाश विजयवर्गीय औबेदुल्लागंज नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती हरप्रीत कौर, मण्डीदीप नगरपालिका अध्यक्ष श्री बद्री चौहान एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और ग्रामीण उपस्थित थे।

भावांतर भुगतान योजना

भावांतर भुगतान योजना की राशी वितरण हुआ शुरू

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की किसानों के लिए बनाई गई भावांतर भुगतान योजना की कड़ी में किसानों को उनकी फसल की अन्तर राशि का भुगतान शुरू हो गया है। चुनावी वर्ष की तैयारियों के साथ मुख्यमंत्री ने गत 22 नवम्बर को उज्जैन में गदगद करने की कोशिश की। हालांकि सरकार से भारी असंतुष्ट किसान सरकार के इन प्रयासों से कितना खुश हो पाएंगे, आने वाला समय बताएगा। योजना में दूसरे चरण के तहत 23 नवम्बर तक फसल विक्रय करने वाले किसानों को 1310 करोड़ रुपये का लाभ मिलने की संभावना है क्योंकि अब तक 1 लाख 65 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवा लिया है। वहीं पहले चरण 16 से 31 अक्टूबर तक मंडियों में फसल विक्रय करने वाले किसानों को भावांतर राशि का भुगतान किया जा रहा है।

 

भावांतर भुगतान योजना में पंजीकृत किसानों द्वारा गत 23 नवंबर तक मंडियों में की गई फसलों की बिक्री से प्रथम दृष्टया लगभग 1310 करोड़ की भावांतर राशि मिलने का अनुमान है। यह भुगतान विक्रय अवधि की समाप्ति के बाद गणना कर किया जायेगा। अब तक भावांतर भुगतान योजना में पंजीकृत किसानों में से 10 लाख 3 हजार किसानों ने 20 लाख 92 हजार मीट्रिक टन कृषि उत्पाद मंडियों में विक्रय किया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों को हर संकट से निजात दिलाएगी राज्य सरकार। मुख्यमंत्री गत दिनों उज्जैन में विशाल किसान सम्मेलन में भावांतर भुगतान योजना में पंजीकृत 1.35 लाख किसानों के खातों में लेपटॉप से एक क्लिक कर 135 करोड़ रूपये की भावांतर राशि ट्रांसफर करने के बाद किसानों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने किसानों को भावांतर राशि के प्रमाण-पत्र भी वितरित किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों को बताया कि प्रदेश में 16 से 31 अक्टूबर के बीच जिन एक लाख 35 हजार किसानों ने अपनी खरीफ की फसल भावांतर योजना में बेची है, उनके खातों में 135 करोड़ रूपये की भावांतर राशि अभी सीधे भेजी गई है। उन्होंने बताया कि इस योजना में सोयाबीन के लिये 470 रूपये, उड़द में 2400 रूपये, मूंग में 1455 रूपये, मूंगफली से 720 तथा मक्का 235 रूपये प्रति क्विंटल भावांतर की राशि किसानों के खाते में डाली गई है।
किसान के बच्चों के लिये कृषक उद्यमी योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के लिये कृषक उद्यमी योजना भी बनाई है। इस योजना में किसान के बच्चों द्वारा कृषि संबंधी उद्योग लगाने पर उन्हें 10 लाख से 2 करोड़ रूपये तक का लोन बिना गारंटी के दिया जायेगा। एक करोड़ के लोन पर 15 लाख तथा 2 करोड़ के लोन पर 30 लाख रूपये का अनुदान भी दिया जायेगा। इसके साथ ही 5 वर्ष तक ब्याज दर मात्र 5त्न रहेगी।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना | Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana or PMKVY in Hindi

PM Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) or Skill India Scheme in Hindi भारत के युवाओं में कौशल का विकास करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विभिन्न कार्यों में सक्षम बना कर देश में रोज़गार लाना है. इस योजना को एमएसएडीई (मिनिस्ट्री ऑफ़ स्किल डेवलपमेंट एंड एंट्रेप्रेनरशिप) द्वारा नियंत्रित और नियमित किया जाता है. इस मंत्रालय का मुख्य काम युवाओं के लिए अवसरों का निर्माण करना है, ताकि इन अवसरों में वे अपना पसंदीदा मार्ग चुन कर अपना भविष्य उस मार्ग की सहयता से बना सकें. इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा. यहाँ पर इस योजना के विषय में सारी जानकारियाँ दी जा रही हैं.

PM Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) or Skill India Scheme in Hindi भारत के युवाओं में कौशल का विकास करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विभिन्न कार्यों में सक्षम बना कर देश में रोज़गार लाना है. इस योजना को एमएसएडीई (मिनिस्ट्री ऑफ़ स्किल डेवलपमेंट एंड एंट्रेप्रेनरशिप) द्वारा नियंत्रित और नियमित किया जाता है. इस मंत्रालय का मुख्य काम युवाओं के लिए अवसरों का निर्माण करना है, ताकि इन अवसरों में वे अपना पसंदीदा मार्ग चुन कर अपना भविष्य उस मार्ग की सहयता से बना सकें. इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा. यहाँ पर इस योजना के विषय में सारी जानकारियाँ दी जा रही हैं.

प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना का मुख्य उद्देश्य (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY) or Skill India Objectives in hindi)

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना युवाओं के लिए शुरू की गयी हैं. इसके अंतर्गत सरकार युवाओं को प्रशिक्षित कर नौकरी मुहैया कराएगी. नीचे इसके विभिन्न उद्देश्यों का वर्णन किया जा रहा है.

  • इस योजना के अंतर्गत सरकार कम से कम देश के 24 लाख युवाओं को विभिन्न तरह के तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना चाहती है, जिसका कुल शुल्क 1,500 करोड़ रुपए का है.
  • देश के युवाओं में कई ऐसे टैलेंट भी हैं, जो हैं तो कारगर किन्तु किसी वजह से लोगों तक नहीं पहुँच पा रहे और लोग उसका लाभ नहीं उठा पा रहे. ऐसे स्किल को लोगों के बीच लाने और औपचारिक तौर पर सर्टिफिकेशन करने के लिए भी इस योजना का प्रयोग किया जाएगा.
  • इस योजना के अंतर्गत पाया गया सर्टिफिकेट समस्त भारत में मान्य होगा. अतः एक न्यूनतम शुल्क के साथ सरकार युवाओं को प्रशिक्षित कर ये सर्टिफिकेट देगी, जिसके आधार पर उन्हें निजी अथवा सरकारी क्षेत्र में नौकरियां प्राप्त हो सकेंगी.
  • इस योजना के तहत युवाओं को उत्कृष्ट स्तर का अनुभव लोगों द्वारा प्रशिक्षित किया जायेगा, ताकि उन्हें उनके चयनित क्षेत्र सम्बंधित हर तरह का ज्ञान हो सके.
  • प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की विशेषताएँ (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Features)


  • प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं.

    • इस योजना के तहत कराई जाने वाली सभी तरह की ट्रेनिंग बहुत ही संजीदगी से कराई जायेगी. विभिन्न क्षेत्रों में ट्रेनिंग प्राप्त करने के लिए विभिन्न योग्यताओं की आवश्यकता होगी. अतः किसी भी तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने से पहले योग्यता की जांच की जायेगी.
    • सभी ट्रेनिंग प्रोग्राम का निर्वाहन सेक्टर स्किल कौंसिल यानि एसएससी द्वारा किया जायेगा. इस कोंसिल के अंतर्गत प्रशिक्षित करने वाले सभी लोग एनओएस और क्यूपीएस के नियमों का निर्वहन करेंगे.
    • इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार के विभिन्न योजनाओं में आवश्यक कार्यकर्ताओं को देखते हुए प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण के बाद युवाओं को विभिन्न सरकारी योजनाएँ जैसे मेक इन इंडिया योजना, डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत अभियान आदि के अंतर्गत नौकरी दी जायेगी.
    • एक बार प्रशिक्षण ख़त्म हो जाने पर प्रशिक्षित युवाओं को रू 8000 और कोर्स कम्पलीशन सर्टिफिकेट दिया जायेगा. ये सर्टिफिकेट सभी जगहों पर मान्य होगा, किन्तु इसे प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण के अंत में लिए जाने वाले परीक्षा में उत्तीर्ण होना होगा.
    • इस योजना की एक विशेष बात ये है कि इस योजना का ब्रांड एम्बेसडर सचिन तेंदुलकर हैं. सचिन तेंदुलकर भारतीय युवाओं के लिये आदर्श के रूप में हैं. अतः युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन को चुना गया है.

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना में नामांकन के लिये योग्यता (PMKVY Eligibility Criteria)

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अन्तर्गत पात्रता के मापदंड का वर्णन नीचे दिया जा रहा है.

    • इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले लाभार्थी को भारत का नागरिक होने की आवश्यकता है. अतः भारत के अन्दर किसी भी राज्य का नागरिक इसका लाभ उठा सकता है.
    • आवेदक को लॉन्च हुए स्कीम में से किसी एक स्कीम के तहत एक साल के लिए पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती है. आवेदक को अपने द्वारा चयनित तकनीकी क्षेत्र का ज्ञान होना आवश्यक है.
    • इसके अलावा भी आवेदक को बाक़ी बचे स्कीम में से एक स्कीम के अंतर्गत पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती है.
    • एक बार ट्रेनिंग पूरी हो जाने के बाद सरकार द्वारा तय किया गया रिवॉर्ड दे दिया जाएगा. सारा रिवॉर्ड एक ही बार में दिया जायेगा.

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत कैसे नामांकन कराएं (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Apply Online)

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को अपना नामांकन कराना होता है.

    • सबसे पहले आवेदक को कौशल विकास योजना की औपचारिक वेबसाइट http://www.pmkvyofficial.org/ पर जा कर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा करना होता है. आवेदन फॉर्म जमा करते हुए आवेदक को नाम, पता, ईमेल आदि भरना होता है. ध्यान रहे कि आप के पास आपके द्वारा दिए जा रहे, आवासीय पते का प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस आदि हो. सभी आवश्यक डिटेल ध्यान से भरें.
    • एक बार फॉर्म भर लिए जाने पर आवेदक को अपने पसंद के एक तकनीकी क्षेत्र का चयन करना होता है, जिसमें उसे प्रशिक्षण ग्रहण करना है. वेबसाइट पर 35 से 40 तकनीकी क्षेत्र दिए गए हैं, जिसमे से अपने पसंद के क्षेत्र का चयन करना होता है. अपने पसंदीदा क्षेत्र के अलावा एक और अतिरिक्त क्षेत्र का भी चयन करना होता है.
    • यह समस्त जानकारियां भर लेने के बाद आवेदक को प्रशिक्षण केंद्र का चयन करना होता है. प्रशिक्षण का केंद्र अपने आवास के आस पास का चुनें. इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करके फॉर्म जमा कर दें.

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत प्रक्रिया (Process Manual for PMKVY)

    इस योजना के अंतर्गत सफलता का प्रमाण पत्र और रिवॉर्ड पाने के लिए कुछ प्रमुख प्रक्रियाओं से गुज़रना होता है, जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है,

    • जिस विद्यार्थी (आवेदक) ने इस योजना के तहत एक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत अपना पंजीकरण करवाया होगा, उसे इस योजना के किसी एक ट्रेनिंग पार्टनर (संस्था) के अंतर्गत एक कोर्स करने का मौक़ा दिया जाएगा.
    • इसके बाद वह संस्था जो, सरकार की इस योजना में काम कर रही है, आवेदक से उसकी सभी जानकारियाँ ले कर एसडीएमएस में संचित रखेगी. एसडीएमएस का वेबसाइट लिंक है : http://www.pmkvyofficial.org/SDMSTraining.aspx
    • इस प्रक्रिया के उपरान्त इस ट्रेनिंग पार्टनर की सहयता से चयनित प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण शुरू हो जायेगा. सेंटर में दिए गये अध्यापकों द्वारा ट्रेनिंग के दौरान हर छात्रों को हर क़दम पर प्रशिक्षित किया जाएगा.
    • प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के उपरान्त विद्यार्थियों को उनके कौशल के आकलन के साथ उनके कार्यक्षेत्र के सरकारी डिपार्टमेंट से कोर्स समाप्ति का सर्टिफिकेट प्राप्त होगा.
    • इस सर्टिफिकेट के प्राप्त कर लेने के बाद एनएसडीसी द्वारा विद्यार्थी के बैंक अकाउंट में कैश रिवॉर्ड किसी सरकारी एजेंसी द्वारा दिया जायेगा.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न कोर्स (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Course)

    अलग अलग लोगो में अलग अलग तरह का कौशल होता है. दो विभिन्न लोगों की सोच भी भिन्न होती है. इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस योजना के अन्तर्गत विभिन्न तरह के कोर्स शामिल किये हैं. अभी तक इस योजना के अंतर्गत 34 विभिन्न कार्यक्षेत्रों का चयन किया गया है, जिसके अंतर्गत ट्रेनिंग दी जायेगी. इन कार्यक्षेत्रों का विवरण नीचे दिया जा रहा है

  • प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के लिए फण्ड एलोकेशन (How Much Fund has been Allocated to PMKV Yojana)
    इस योजना के लिए सरकार ने कुल 15,000 करोड़ रुपए का फण्ड एलोकेट किया है. इस फण्ड की सहायता से 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा. इस फंड का इस्तेमाल जिन विभिन्न क्षेत्रों में अब तक किया गया है, उसका वर्णन नीचे दिया जा रहा है.

    • लगभग 220 करोड़ रूपए उन युवाओं पर कर्च किया जाएगा, जो पहले से कोई विशेष ट्रेनिंग ले चुके हैं.
    • लगभग 67 करोड़ रुपए योजना को संचालित और युवाओं को इस डेवलपमेंट के तहत जागरूक करने के लिए किया जाएगा.
    • लगभग 67 करोड़ रूपए का प्रयोग सरकार मेंटरशिप और प्रशिक्षित युवाओं को रोज़गार देने के लिए करेगी, ताकि विद्यार्थी अपनी रूचि अनुसार प्रशिक्षण के हर मुकाम पर पहुँच सके.
    • इस तरह से बाक़ी फण्ड का प्रयोग भी सरकार आने वाले समय में आवश्यक युवा कल्याणकारी क्षेत्रों में करेगी.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुल्क(Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Fees)

    सरकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की सहायता से युवाओं को सशक्त और उनके भविष्य को उज्जवल बनाना चाहती है. कई युवा पैसे की कमी की वजह से अपना मन पसंद कोर्स नहीं कर पाते और इस वजह से उन्हें रोज़गार नहीं मिल पाता है. हालाँकि कई निजी प्रशिक्षण केंद्र हैं, किन्तु उनका शुल्क इतना अधिक होता है कि ग़रीब युवाओं के लिए वहाँ जाना भी मुश्किल है. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस प्रशिक्षण योजना के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं रखा है. इस योजना के अंतर्गत सभी प्रशिक्षण पूरी तरह से निःशुल्क दिए जायेंगे. इससे कई कमजोर तबके के युवाओं को ख़ूब लाभ मिलेगा और वे स्वयं को समर्थ बना पायेंगे.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का प्रशिक्षण अवधि (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Training Period)

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत कई छोटे बड़े आवश्यक और कारगर कोर्स को शामिल किया गया है. विभिन्न कोर्स को पूरा करने के लिए विभिन्न समयावधि की आवश्यकता होती है. अतः इस योजना के अंतर्गत भी सरकार ने विभिन्न कोर्स के लिए विभिन्न समयावधि तय की है. आम तौर पर कई ऐसे कोर्सेज मौजूद हैं, जिनकी समयावधि 3 से 6 महीने की रखी गयी है, इसके अलावा कुछ कठिन कोर्स के लिए अधिकतम 1 वर्ष का समय तय किया गया है. 1 वर्ष से अधिक की समयावधि का किसी तरह के कोर्स को शामिल नहीं किया गया है.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में मूल्यांकन प्रक्रिया (Pradhan MantriKaushal Vikas Yojana AssessmentProcess)

    इस योजना के अंतर्गत जिन युवाओं ने अपना नामांकन कराया है, उन्हें अपना कौशल विकास करना अनिवार्य है. यदि युवा किसी भी तरह से स्वयं को कोर्स के अनुरूप योग्य नहीं बना पाता है, और अपना कौशल प्रदर्शित नहीं कर पाता है, तो उसे सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. कभी कभी ट्रेनिंग के बीच में सरकारी प्रतिनिधि कार्यों का ब्योरा लेने आयेंगे, यह एक तरह की ‘सरप्राइज विजिट’ होगी. इस आधार पर भी विद्यार्थियों का मूल्यांकन होगा. इस तरह विभिन्न मापदंडों को आधार बना कर कोर्स के अंत में किसी विद्यार्थी के लिए सर्टिफिकेट तैयार किया जाएगा.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत रिवॉर्ड (Pradhan Mantri KaushalVikas Yojana Rewards)

    इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त किये युवा को आम तौर पर रू 8000 का रिवॉर्ड प्राप्त होगा. यह रिवॉर्ड विभिन्न ट्रेनिंग के लिए विभिन्न है. इसके लिए विभिन्न तरह के स्तर तय किये गये हैं, जो ट्रेनिंग की कठिनाइयों पर निर्भर करते हैं. स्तर 1 और 2 के अंतर्गत प्रशिक्षित हुए युवाओं को रू 7,500 मिलेगा, जो कि स्तर 3 और 4 के अंतर्गत प्रशिक्षित हो रहे युवाओं के लिए 10,000 हो जाएगा. यदि युवा स्तर 5 या 6 के कोर्स को पूरा करता है तो ये रिवॉर्ड रू 12,500 का होगा.

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत नौकरी की गारंटी (Pradhan MantriKaushal Vikas Yojana JobGuaranteed)

    युवाओं को सशक्त करने के लिए सिर्फ ट्रेनिंग देना ही काफ़ी नहीं है. इसके बाद उन्हें रोज़गार मुहैया कराना भी एक अहम् काम है, ताकि उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान जो भी सीखा है, उसका प्रयोग अपने जीवन निर्वाह के लिए कर सकें. भारत सरकार कई तरह की योजनायें चला रही है, अतः एक बार प्रशिक्षण पूरा हो जाने पर सरकार इन युवाओं को इन्हीं योजनाओं के तहत रोज़गार मुहैया कराएगी. सभी प्रशिक्षित युवाओं को उनके प्रशिक्षण के अनुसार विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत रोज़गार दिया जाएगा.

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना प्रशिक्षण केंद्र (Pradhan Mantri Kaushal VikasYojana Training Center)

    योजना के लॉन्च होने के साथ ही कई निजी प्रशिक्षण केन्द्रों ने अपना पंजीकरण कौशल विकास योजना के अंतर्गत कराया है. यह सभी प्रशिक्षण केंद्र अब इस योजना से जुड़ चुके हैं, अतः इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सारी सुविधाएँ और कुछ विशेष कार्य क्षेत्र, जिसके लिए संस्था को प्रशिक्षण हेतु चुना गया है, यहाँ पर दी जायेंगी. इस योजना का प्रसार पूरे भारत में है. प्रशिक्षण केन्द्रों का ब्यौरा जानने के लिए दिए गये वेबसाइट पर विजिट करें और ‘सेंटर शीट’ फाइल डाउनलोड करें : http://www.pmkvyofficial.org/Training-Centre.aspx

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से लाभ (Pradhan Mantri Kaushal VikasYojana Benefits)

    भारत सरकार भारत को निर्माता के तौर पर वैश्विक केंद्र बनाना चाहती है औए यह तभी संभव है जब यहाँ पर निर्माण कार्य करने जैसी प्रतिभा मौजूद हो. इसके लिये सरकार ने एमएसडीई मंत्रालय के अधीन ‘नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन’ का गठन किया है, जिसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है.

    1. इस योजना की सहायता से कई बेरोजगार और अप्रशिक्षित युवाओं को मुफ्त में विभिन्न तरह के कार्यों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा.
    2. प्रशिक्षण पूरे हो जाने पर इन्हें सरकार द्वारा आर्थिक सहायता भी स्कालरशिप के तौर पर और साथ ही प्रशिक्षित क्षेत्र में सरकार द्वारा नौकरी दी जायेगी. इससे युवाओं को जीविकोपार्जन में मदद मिलेगी.
    3. प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को एक्सपर्ट की मदद प्राप्त होगी, जिससे युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने का पूर्ण अवसर प्राप्त होगा.
    4. इस योजना के तहत प्रशिक्षित युवा को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा, जिसकी सहायता से भविष्य में वह अन्य कर्म स्थलों में भी रोज़गार प्राप्त कर सकेगा. यह सर्टिफिकेट भारत के सभी राज्यों में मान्य होगा.
    5. प्रशिक्षण की न्यूनतम समय सीमा 3 मीहने और अधिकतम समय सीमा 1 वर्ष की है. अतः अधिकतम 1 वर्ष में ट्रेनिंग पूरी करा दी जायेगी और नौकरी प्राप्त हो सकेगी.
    6. इस योजना की सहायता से कौशल केंद्र की स्थापना की जायेगी, जो सरकार के विभिन्न युवा कल्याणकारी योजनाओं को पूरा करने में सरकार की मदद करेंगे.
    7. बहुत से युवा जो कौशल न होने की वजह से बेरोजगार हैं, उन्हें विभिन्न कार्यो के लिए सक्षम बनाया जाएगा.
    8. इसकी सहायता से सरकार को अन्य योजनाओं को सफ़ल बनाने के लिए कुशल युवाओं का सहयोग प्राप्त होगा. जितने युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा उन्हें इन योजनाओं में काम पर लगाया जाएगा.

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की चुनौतियां (Pradhan Mantri KaushalVikas Yojana Challenge)

    प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना की शुरुआत हो चुकी है और इसका लाभ अधिकतर शहरी नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं तक यह योजना पहुँचने में कठिनाई हो रही है, अतः सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को इस तरह की किसी योजना से जोडने के लिए अधिक से अधिक कौशल केंद्र की स्थापना करने का प्रयत्न कर रही है. इसी के साथ देश के 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना भी अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है. इस चुनौती को पूरा करने के लिए एनएसडीसी पूरी तरह से कार्यरत

डीजल पर अतिरिक्त अधिभार समाप्त

डीजल-पेट्रोल पर वैट में कमी : डीजल पर अतिरिक्त अधिभार समाप्त

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की जनहितकारी घोषणा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए डीजल और पेट्रोल में लगने वाले वैट की दर में कमी करने की घोषणा की है। उन्होंने डीजल पर डेढ़ रूपये प्रति लीटर के अतिरिक्त अधिभार को भी समाप्त कर दिया है। यह दरें आज मध्यरात्रि से प्रभावशील होंगी। वैट कम होने से डीजल प्रति लीटर जो अभी 63 रूपये 31 पैसे में मिल रहा था, वह अब 59 रूपये 37 पैसे प्रति लीटर के भाव में मिलेगा।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आम जनता और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उन्हें राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल के भावों में कमी करने का यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतें घटने से माल भाड़ा दरें कम होंगी और वस्तुएँ सस्ती होंगी।

श्री चौहान ने बताया कि डीजल पर पाँच प्रतिशत वैट में कमी की गयी है। साथ ही डीजल पर लगने वाले अतिरिक्त अधिभार प्रति लीटर एक रूपये पचास पैसे को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पर लगने वाले वैट को भी तीन प्रतिशत कम कर दिया गया है।

 

ट्रैक्टर : क्या हर किसान के लिए जरूरी है ?

किसानो को कर्ज के मुह में धकेला जा रहा है

अभी खरीदी का त्योहार चल रहा है, बहुत से किसान नया ट्रैक्टर खरीदने के सोच बना रहे होंगे, परन्तु मशीनीकरण के नाम पर ट्रैक्टर खरीदना किसानो को कर्ज के तले ले जा रहा है, सन 1993-94 से देश में ट्रैक्टर का दौर चला जिसके साथ साथ एक दौर और चालू हो गया वो था, किसानो की आत्महत्या का दौर.

एक ट्रैक्टर के लिए औसतन 1000 से 1200 घंटे का कार्य हो तो ट्रैक्टर लाभदायक माना जाता है, फिर भी हमें कम से कम 400 से 500 घंटे का कार्य भी हो तो ले सकते है, अभी हमारे देश में सरकार, बैंक और ट्रैक्टर कम्पनी अपनी आमदनी बढाने के लिए किसानो के गले में फासी का फंदा डाल रही है, इसलिए बहुत छोटे अमाउंट के साथ ट्रैक्टर देकर बैंक से फाइनेंस करवा दिया जाता है, जबकि यह नहीं देखा जाता है की किसान की आवश्यकता है या नहीं, आज देश में हर साल 6 लाख से ज्यादा ट्रैक्टर बिकते है जिसमे से अधिकतर ट्रैक्टर छोटे किसान और बाकि पुराने को बदलकर स्कीम में नया लेने का दौर जारी है |

क्या ट्रैक्टर खरीदने के पहले इसके अर्थशात्र को समझया या समझने की किसान ने कौशिश की है, आज के समय 6 लाख का ट्रेक्टर, 2 लाख की ट्रोली और 1.5 लाख का सीडरील आती है, जो कि कुल मिलकर 10 लाख के होते है |

यदि एक किसान 10 लाख का सामान व्याज पर लेता है साल में उसे 1 लाख से 1.20 लाख तक का व्याज देना और दूसरा 10% की दर से मशीन का घिसावत या भाव कम होना. तो कुल मिलकर किसान 1 लाख का प्रतिवर्ष घिसावत साथ ही साथ करीब 50 हजार का रखरखाव और डीजल आदि का खर्च होता है |

सब खर्चो को जोड़े तो 2.5 से 2.8 लाख रूपये का एक ट्रैक्टर उधार खरीदने में खर्च आता है बाकी आपके 10 लाख तो अलग से है ही, इसलिए जिन जिन छोटे किसानो ने ट्रैक्टर लिए है वो 10 साल खेती सिर्फ बैंक और ट्रैक्टर कम्पनी के लिए करते है उस बीच कभी फसल ख़राब हो गई तो समझो कोई रास्ता नहीं है |

जबकि एक छोटा किसान ट्रैक्टर खरीदने की बजाय गाँव के किसी किसान जिसके पास ट्रैक्टर है उसको 50 हजार से 1 लाख में पूरा खेत का कार्य करवा सकता है. दूसरा उस ट्रैक्टर वाले किसानो को अलग से कार्य मिल जाता है जिससे वह अपना खर्च निकल सकता है | इसलिए ट्रैक्टर के नाम पर मशीनीकर नहीं बल्कि किसानो को कर्ज के मुह में धकेला जा रहा है |

इसलिए ट्रैक्टर खरीदने के पहले सोच और सरकार ने तुरंत इस पर अपनी नीति तय करना चाहिए, जिन किसान के पास 70% रकम नहीं है उन्हें ट्रैक्टर नहीं दिया जाना चाहिए