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धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के कारगर उपाय

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धान की फसल में पाये जाने वाले प्रमुख खरपतवार सावां घास, सावां, टोडी बट्टा या गुरही, रागीया झिंगरी, मोथा, जंगली धान या करघा, केबघास, बंदरा- बंदरी, दूब (एकदलीय घास कुल के), गारखमुडी, विलजा, अगिया, जलकुम्भी, कैना, कनकी, हजार दाना और जंगली जूट हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए निम्रलिखित उपाय अपनावें:-
1. जहां खेत में मिट्टी को लेव बनाकर और पानी भरकर धान को रोपा या बाया जाता है, वहां जो खरपतवार भूमि तैयार करने से पहले उग आते हैं, वे लेव बनाते समय जड़ से उखाड़कर कीचड में दब-सड़ जाते हैं। इसके बाद मिट्टी को 5 से. मी. या अधिक पानी से भरा रखने पर नए व पुराने खरपतवार कम पनप पाते हैं।

2. बीज छिटकवां धान जिसमें बियासी नहीं की जाती हो, वहां बुआई के तुरन्त बाद या नई जमीन में या सूखी भूमि में बोनी के बाद, पानी बरसने के तुरन्त बाद ब्यूटाक्लोर 2.5 लीटर/ हेक्टेयर सक्रिय तत्व का छिड़काव 500 लीटर पानी में घोलकर करने से लगभग 20 से 25 दिनों तक खरपतवार नहीं उगते हैं। खड़ी फसल में दो बार 20-25 दिनों और 40-45 दिनों की अवस्था पर निंदाई करें।
3. बीज छिटकवा धान जहां बियासी की जाती हो वहां बियासी करने के बाद 7 दिनों के अन्दर निंदाई और चलाई किया जाना चाहिये। दूसरी निंदाई 25-30 दिनों पर करना चाहिये। बियासी के लिए समय पर पानी उपलब्ध होने पर निंदाई करना चाहिये। बुआई के 40-45 दिनो बाद बियासी नहीं करना चाहिये

4. धान के खेत में खरपतवार नियंत्रण हेतु रसायनिक विधियां अधिक कारगर सिद्ध हुई हंै, जिनका विवरण सारणी में दिया गया है।
धान के खेत में नोमिनो गोल्ड खरपतवारनाशक सिर्फ एक ही छिड़काव में सभी प्रमुख खरपतवारों (डिला मोथा, छतरी वाला मोथा, फिम्बीस्टाइलिस) घुई (मोथा के विभिन्न प्रकार पान पत्ता, पानी घास, पीले फूल वाली बूंटी मिर्च बूंटी चार पत्ती, सफेद फूस वाली बूंटी (चौड़ी पत्ती)और घास (स्वांकी , स्वांक और कनकी) को नियंत्रित करता है। इस खरपतवारनाशक को खरपतवार निकलने के बाद 10-25 दिन के बीच में प्रयोग कर सकते हैं। यह खरपतवारनाशक सीधे बोये गये धान, धान की नर्सरी और रोपित धान, सभी में प्रभावी खरपतवार नियंत्रण करता है। यह खरपतवारनाशक धान की फसल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है एवं धान को कोई आघात नहीं पहुंचाता है।

एक हेक्टेयर में ‘नोमिनो गोल्डÓ खरपतवारनाशक दवा की 200 से 300 मिली लीटर को 450 से 500 लीटर पानी में मिलाएं और खेत में से पानी निकालकर खरपतवारनाशक दवा का छिड़काव करें ताकि खरपतवार पर दवा का प्रयोग हो सके। खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव करने के 2-3 दिन बाद दुबारा खेत में पानी भर दें एवं कम से कम एक सप्ताह तक 3-5 से.मी. पानी खड़ा रहने दें।

यह खरपतवारनाशक दवा छिड़काव के 6 घण्टे में ही अपना काम शुरू कर देता है। 6 घण्टे बाद बरसात आने पर भी खरपतवार नियंत्रण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता इस खरपतवारनाशी को अन्य पौध रक्षक रसायनों के साथ मिश्रण के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है और इसका धान पर कोई प्रतिकू ल प्रभाव नहीं पड़ता है।

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