Mahu (Fudka)
On the harvest of paddy, brown mahu, white back mahu and green mahu outbreak is seen. This pest sucks the juice from plants to affect the growth and growth of plants. Brown mau, in the lower part of the stem of the paddy, sucks the juice from the plants by remaining present on the surface of the water. Its outbreaks start from a place in the paddy field and spread round shape to further plants
Increases while affecting. The affected plants begin to dry out when the insect grows outbreak. And the black-toothed brown reggae appears to this affected area called Haper Burn. The white-backed mau sucks the juice of plants, staying in the top of the stem of the paddy. The grit plant becomes yellowish-brown when it is a fiery outbreak. The green menstrual pest outbreak is higher in September-October Mass. This pest also affects the growth growth of the juice from the plants. Additionally, this insect is a carrier of turgro disease. If the seedlings/buy of paddy plants have been passed, more experimentation of nitrogenous fertilizers, stabilization of water planted in the fields, greater humidity
Management
Chemical methods:- Spray thiomethaxum 24 W.G., 1 g per 4 liters of water or 1 ml per liter of ethofenprex 10 E.C. with a solution of water. Spray the pestilence in the lower parts of the plant on the stem and water surface of the paddy.
Diseases – Brown smear English Name Brown smear
Factors Bacterial Helminthosporium Oregy
Symptoms and damage
A lot of elliptical slate spots appear on the leaves and earrings that are later browned. The spots together become large spots. The plant dies. The development of the earrings is stopped. There is no rash in the hairs. This disease can occur at any stage of harvest. The quality of the rash decreases.
Control
थाईरम 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज से उपचारित करें या कार्बेंडाजिम 1.5 ग्रा./ कि.ग्रा. बीज से उपचारित करें।
मेनेकोजेब 0.25 प्रतिशत की दर से 10 से 15 दिन के अंतराल में लक्षण दिखते ही छिड़काव करें।
IPM
प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
स्वच्छ खेती करें।
फसल चक्र अपनाए।
रोपण की तिथि में बदलाव करें।
उचित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।
उपयुक्त जल प्रबंधन करें।
पोटाश की कमी की पूर्ति के लिए पोटाश युक्त उर्वरकों का उपयोग करें।
Diseases – Tungro Virus
Suomi Name Yellow Virus Disease

Factors Bacterial Nephytices Malaiss, Nagropictus
Symptoms and damage
उष्नकटी बन्धी क्षेत्र में टंग्रो वायरस सबसे मुख्य धान का रोग है।
प्रभावित पौधे छोटे रह जाते है और कल्ले की संख्या में कमी हो जाती है।
पत्तियां छोटी हो जाती है।
पुरानी पत्तियों के किनारे से पत्तियों का रंग हरे से हल्का पीला,हल्का पीला से नांरगी पीला एवं नांरगी पीला से भूरा पीला हो जाता है।
सामान्यत:प्रभावित पौधे पकने तक जीवित रहते है।
बालियों नहीं बनती है।
जितना छोटा पौधा रहता है उतना ही अधिक संक्रमण होता है।
Control
नर्सरी :कार्बोफ्यूरान के दाने 1 कि.ग्रा. ( सक्रिय तत्व) प्रति हेक्टेयर का भुरकाव करें।
कल्ले बनने के पहले और कल्ले आने के मध्य : कार्बोफ्यूरान के दाने 1 कि.ग्रा. ( सक्रिय तत्व) प्रति हेक्टेयर का भुरकाव करें। या मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव 0.5 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व /हे करें।
IPM
रोपणी से पहले प्रभावित पौधों को अलग कर दे।
प्रभावित पौधों को अलग कर नष्ट कर दे और अतिरिक्त नत्रजन भरवाई के लिए डाले।
Disease – Falls Smut
Suomi name – Virtual Kandwa
Factor Bacteria – Usliganioid Virens
Symptoms and damage

रोग फूल आने के बाद में दिखता है।
इस रोग में बालियों में दाने हरे काले हो जाते है।
संक्रमित दाने छिद्र युक्त चुर्ण से ढके रहते है।
हवा से उड़कर यह स्वस्थ फूलों को भी संक्रमित कर देते है।
अधिक संक्रमण होने पर सारे दाने खराब हो जाते है।
Control
प्रोपेकोनोज़ोल ( टिल्ट) 1 मि.ली. प्रति लीटर या क्लोरोथोलोनिल 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से फूल निकलने समय छिड़काव करें।
दूसरा छिड़काव फूल पूरी तरह से आने के बाद करें।
पोटाश उर्वरकों को डाले।
IPM
दो से तीन साल के लिए फसल चक्र अपनाए।
गहरी जुताई से भूमि में गिरे स्केलोरेशिया नष्ट हो जाते है।
संक्रमित दाने एवं पौधों को नष्ट करें।
संक्रमित पौधों से बीज न इकटठा करें।
Diseases – Bacterial Leafyke
Suomi name – Striped Bacterial Disease
Factor Bacteria – Genthomones Chemepestris
Symptoms and damage
बाढ़ आने पर इस रोग की संभावना होती है।
इस रोग में पत्तियों पर पानीदार धब्बे बनते है।
धब्बों के आसपास चिपचिपी बूंदे जमा होती है।
इनकी पत्तियां पीला से नांरगी भूरी हो जाती है।
छोटे धब्बे मिलकर पत्तियों की सतह पर बड़े धब्बे बन जाते है।
रोग के लक्षण दो भागों में दिखाई देते है। क्रेसिक फेस ब्लाइट फेस
क्रेसिक भाग पौधे की प्रांरभिक अवस्था में मुरझााकर सुख जाते है।
बाद की अवस्था में ब्लाइट फेस के लक्षण दिखते है जो पत्ती के ऊपर और किनारे में दिखाई पड़ते है।
धीरे धीरे बढ़कर बड़े एवं लम्बे धब्बे बन जाते है।
जल्दी ही धब्बे पीले से सफेद हो जाते है।

Control
5 ग्राम स्ट्रेपटोसाइक्लीन 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से रोग की शुरूवात में छिड़काव करें।
बाद में 09-12 दिन के अंतराल से छिड़काव करें।
IPM
रोग मुक्त बीजों का उपयोग करें।
Disease – Bacterial Leaf Blight
Suomi name – Shakanu Zulson Disease
Factor Bacteria – Anthomones Orizi
Symptoms and damage
बाढ़ आने पर इस रोग की संभावना होती है।
इस रोग में पत्तियों पर पानीदार धब्बे बनते है।
धब्बों के आसपास चिपचिपी बूंदे जमा होती है।
इनकी पत्तियां पीला से नांरगी भूरी हो जाती है।
छोटे धब्बे मिलकर पत्तियों की सतह पर बड़े धब्बे बन जाते है।
रोग के लक्षण दो भागों में दिखाई देते है। क्रेसिक फेस ब्लाइट फेस
क्रेसिक भाग पौधे की प्रांरभिक अवस्था में मुरझााकर सुख जाते है।
बाद की अवस्था में ब्लाइट फेस के लक्षण दिखते है जो पत्ती के ऊपर और किनारे में दिखाई पड़ते है।
धीरे धीरे बढ़कर बड़े एवं लम्बे धब्बे बन जाते है।
जल्दी ही धब्बे पीले से सफेद हो जाते है।

Control
15 ग्राम स्ट्रेपटोसाइक्लीन 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से रोग की शुरूवात में छिड़काव करें।
बाद में 09-12 दिन के अंतराल से छिड़काव करें।
IPM
मध्यम प्रतिरोधक एवं सहनशील किस्में जैसे गोविंद, पंत धान-4, पंत धान-10, पंत धान-12, आई.आर.-8,आई.आर.-20ए बाला,रत्ना, जया इत्यादि।
रोग मुक्त फसल से बीज लें।
मिट्टी परीक्षण के बाद नत्रजन की संतुलित मात्रा विभाजित करके दें।
Diseases – Wella
Deutsche name – Kula
Symptoms and damage
यह रोग जस्ते की कमी से होता है।
नर्सरी में पौधे पीले पड़ते है।
पत्तों के बीच वाली शिरा के पास पीलापन दिखाई देता है।
पौधों की बढ़वार रूक जाती है।
पत्ते सूख जाते है।

Control
बीज को बोने से पहले रात भर जिंक सल्फेट के 0.4 प्रतिशत घोल में भिगाए। या जिंक सल्फेट 5 कि.ग्रा. और चूना 2.5 कि.ग्रा. का छिड़काव करें।
पहला छिड़काव नर्सरी में बोने के 10 दिन बाद करें।
दूसरा छिड़काव बोनी के 20 दिन बाद करे और
तीसरा छिड़काव रोपणी के 15 से 30 दिन बाद करें।
रोपण के पहले 2 प्रतिशत जिंक ऑक्साइड के घोल में रोपा को डुबाये।
IPM
रोपा को बोने से पहले 1 से 2 मिनट तक जिंक सल्फेट के 0.2 प्रतिशत घोल में भिगाए।
Disease – Cath Blight
Suomi name – Zulsson Disease
Factor Bacterial Ö – Cotcium Sasaki
Symptoms and damage
यह रोग कल्ले बनते से बालियां आने तक हो सकता है।
इससे तने चटकते है।
पत्तियों पर सफेद अनिश्चित गहरे भूरे पत्ते के सिरे हो जाते है।
पत्तियां नोक से अन्दर की ओर सूखने लगती है।
बालियों में दानों का विकास नहीे होता।

Control
लक्षण दिखते ही प्रोपोकेनोजॉल ( टिल्ट) 1 लीटर /हे या कॉनटाज 2 लीटर/हे की दर से 15 दिन के अंतराल से छिड़काव करें।
सुडोमोनास फलोरीसेन्स 10 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें एवं 100 ग्राम 6 लीटर पानी में मिलाकर रोपणी को 24 घंटे डुबाकर रखें।
थाईरम 75 प्रतिशत से बीज उपचार करें।
रोपाई से पहले भूमि का उपचार 25 कि.ग्रा./हे की दर से थाईरम से करें।
IPM
प्रतिरोधक किस्मों को बोये।
नत्रजन की मात्रा और पौधों का अंतराल घटाये।
कटाई के बाद प्रभावित पौधों के अवशेषों को जलाए।
खेत को खरपतवार से मुक्त रखे।
खेत की मेढ़ों को साफ रखें।
उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करें। पोटेशियम की अतिरिक्त मात्रा डाले।

