भोपाल, 30 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले तीन दिनों से जारी मूंग किसानों का हाई-प्रोफाइल आंदोलन बुधवार देर रात आखिरकार समाप्त हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने राजधानी की घेराबंदी कर रखी थी, जिसे सरकार के साथ सफल वार्ता के बाद हटा लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा गठित मंत्री समूह और किसान प्रतिनिधियों के बीच सचिवालय में हुई घंटों लंबी बातचीत में सरकार ने मूंग की खरीद सीमा को उत्पादन के 25% से बढ़ाकर 60% करने और विवादित ई-टोकन उर्वरक प्रणाली को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांगें स्वीकार कर लीं।
संकट की जड़: बंपर पैदावार और सीमित खरीद
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण रिकॉर्ड पैदावार और सरकारी खरीद के नियमों के बीच का बड़ा अंतर था। किसानों ने इस वर्ष प्रति एकड़ लगभग 5 क्विंटल मूंग की बंपर फसल पैदा की है, लेकिन केंद्र सरकार की पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना के तहत खरीद केवल 1.25 क्विंटल प्रति एकड़ तक सीमित थी। खुले बाजार में कीमतें ₹6,500 प्रति क्विंटल तक गिर गई थीं, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,682 प्रति क्विंटल था। इस बड़े अंतर के कारण किसानों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसके अलावा, उर्वरक वितरण के लिए शुरू की गई नई ‘ई-टोकन’ व्यवस्था में तकनीकी खामियों और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी ने किसानों की नाराजगी को और बढ़ा दिया।
जमीनी हकीकत और प्रमुख आवाजें
नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों से शुरू हुई ‘किसान क्रांति यात्रा’ ने भोपाल के होशंगाबाद रोड पर यातायात को पूरी तरह ठप कर दिया था। प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की और सड़कों पर ही खाना बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के नेता अरुण पटेल ने कहा, “हमें फसल विविधीकरण और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन जब हम बंपर पैदावार करते हैं, तो सरकार हमें निजी व्यापारियों के रहमों-करम पर छोड़ देती है“। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन दिया लेकिन बाद में उन्हें गुमराह किया गया।
सरकारी पक्ष रखते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद को पहले ही मंजूरी दे दी थी, जो पूरे देश की कुल स्वीकृत मात्रा का 87% है। उन्होंने राज्य सरकार से खरीद की गति बढ़ाने का आग्रह किया। राज्य के कृषि मंत्री ऐडल सिंह कंसाना ने कहा, “हमारी सरकार हमेशा किसानों के हित में काम करती है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें अपनी उपज का वाजिब दाम मिले”।
वित्तीय प्रभाव और आगे की राह
अब किसान प्रति एकड़ लगभग 3 क्विंटल मूंग सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे। सरकार ने खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की समय सीमा बढ़ाकर 10 अगस्त और वास्तविक खरीद की अवधि 20 अगस्त 2026 तक कर दी है।
उर्वरक प्रणाली के संबंध में, सरकार ने एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है जो ई-टोकन व्यवस्था की खामियों की जांच करेगी और सुधार के सुझाव देगी। तब तक खाद का वितरण पुरानी ऑफलाइन पद्धति से ही जारी रहेगा। हालांकि यह समझौता तात्कालिक राहत प्रदान करता है, लेकिन इसने एक बार फिर उस बड़ी बहस को जन्म दे दिया है कि क्या दालों की खरीद प्रणाली को भी गेहूं और धान की तरह पूरी तरह खुला (Open-ended) कर देना चाहिए। फिलहाल, भोपाल की सड़कें खाली हो गई हैं, लेकिन भविष्य की नीतिगत सुधारों पर किसानों की नजर बनी रहेगी।

