नींबू वर्गीय बागों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं उनके निदान के उपाय

नींबू वर्गीय बागों लेमन, माल्टा, संतरा, नींबू और मौसमी आदि में पोषक तत्वों (खाद और उर्वरक) का प्रयोग संस्तुतियों के आधार पर करना चाहिए| नींबू वर्गीय बागों में प्रयोग की जाने वाली पोषक तत्वों की मात्रा मिटटी की किस्म, उर्वरता, अंतरवर्ती फसल और उसमें की गई कृषि-क्रियाएँ एवं नींबू वर्ग की उगाई जाने वाली किस्म, […]

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कीट प्रबंधन – मक्का

कीट कॉलाम्बा लिविया प्रचलित नाम ब्लू कॉक पीजन पैराकीट क्रो क्षति आई.पी. एम नियंत्रण कीट रोपालोसिफम माइडिस प्रचलित नाम माहू क्षति आई.पी. एम नियंत्रण कीट चिलो पारटुलस प्रचलित नाम धारीदार तना छेदक कीट क्षति आई.पी. एम नियंत्रण कीट सेसेमिया इनफेरेन्स प्रचलित नाम गुलाबी तना छेदक क्षति आई.पी. एम नियंत्रण कीट पल्यूशिया एक्यूटा प्रचलित नाम पल्यूशिया […]

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कीट प्रबंधन – सोयाबीन

कीट प्रबंधन – सोयाबीन कीट मेलेनाग्रोमाईज़ा सोजे प्रचलित नाम तना मक्खी क्षति आई.पी. एम. नियंत्रण कीट लेप्रोसिमा इडिकेटा प्रचलित नाम पत्ता मोडक ( लीफ फोल्डर ) क्षति आई.पी. एम. नियंत्रण कीट डेक्टीस टेकसान्स टेकसान्स प्रचलित नाम तनाछेदक क्षति आई.पी. एम. नियंत्रण कीट स्पोडोपेटरा लिटुरा प्रचलित नाम तम्बाखू इल्ली क्षति आई.पी. एम. नियंत्रण कीट एफिड प्रचलित […]

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रोग प्रबंधन - सिंचित धान

रोग प्रबंधन – सिंचित धान

माहू (फुदका) धान की फसल पर भूरा माहू, सफेद पीठ वाला माहू तथा हरा माहू का प्रकोप देखा जाता है। यह कीट पौधों से रस को चूसते है जिससें पौधों की वृद्धि तथा विकास प्रभावित होता है। भूरा माहू, धान के तने के निचले भाग में, पानी की सतह के उपर मौजूद रहकर पौधें से […]

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कीट प्रबंधन - सिचित धान

कीट प्रबंधन – सिंचित धान

कीट – ट्राईपोराइज़ा इंसर्टुलस प्रचलित नाम – तना छेदक क्षति आई.पी. एम कीट अवरोधी प्रजातियों जैसे रत्ना,जयश्री, दीप्ती, साकेत, विकास इत्यादि की बुआई करें। नत्रजन युक्त उर्वरकों का उचित व संतुलित मात्रा में उपयोगकरें। कीट नियंत्रण अपनाए। गर्मी में गहरी जुताई करें। समय से पूर्व या समय पर रोपाई/बुआई करें। स्वस्थ नर्सरी का विकास करें […]

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कैसे करें आम की खेती

परिचय भारतवर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम हैं। इसके स्वाद, सुवास एवं रंग-रूप के कारण इसे फलों का राजा कहा जाता हैं। उत्पादन एवं क्षेत्रफल दोनों की दृष्टि से आम भारत का प्रमुख फल है। विश्व के कुल आम उत्पादन का लगभग 43.4 प्रतिशत भाग […]

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मूंग की उन्नत खेती

मूंग ग्रीष्म एवं खरीफ दोनो मौसम की कम समय में पकने वाली एक मुख्य दलहनी फसल है। इसके दाने का प्रयोग मुख्य रूप से दाल के लिये किया जाता हैजिसमें 24-26% प्रोटीन,55-60% कार्बोहाइड्रेट एवं 1.3%वसा होता है। दलहनी फसल होने के कारण इसकी जड़ो में गठाने पाई जाती है जो कि वायुमण्डलीय नत्रजन का मृदा […]

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dhaniya ki kheti

धनिया कैसे उगाएं | धनिया उत्पादन की उन्नत तकनीक

धनिया (Coriandrum sativum) एक गहरे हरे रंग की पत्तियां हैं जो एशियाई और लैटिन व्यंजनों में जायका बड़ाने के लिए ताजा काटकर उपयोग किया जाता है। यह कोरिएन्डर या चाइनीज़ पार्सले के नाम से भी जाना जाता है। धनिया विकसित करना कठिन नहीं है, इस के बीज को मिट्टी और बर्तन में लगाया जा सकता […]

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जीरे की फसल में कीट एवं रोग से बचाव

विभिन्न बीजीय मसाला फसलों में जीरा अल्पसमय में पकने वाली प्रमुख नकदी फसल हैं। जीरे के दानों में पाये जाने वाले वाष्पषील तेल के कारण ही इनमें जायकेदार सुगध होती है। इसी सुगन्ध के कारण जीरे का मसालों के रूप में उपयोग किया जाता है। जीरे में यह विषिष्ट सुगंध क्यूमिनॉल या क्यूमिन एल्डीहाइड के […]

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गेहू की फसल मे रोग प्रबंधन

गेहू की फसल मे रोग प्रबंधन

रबी फसल – गेहू  रोग प्रबंधन – गेहू आल्टरनेरिया ब्लाइट आल्टानेरिया पर्ण झुलसन जीवाणु अंगमारी और कडुआ रोग जीवाणु रोग पीला सड़न तुषाभ सड़न और जीवाणुपत्ती अंगमारी सूटी मोल्ड भुरे गेरूआ रोग जौ का पीत वामनता रोग वामनता बंट वामनता बंट 2 क्राऊन सड़न मुदुरोमिल आसिता, हरितबाली गेहूँ का अरगट रोग राईज़ोटोनिया सोलानी काला बिंदु […]

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